Monday 27 August 2012

सपनों से भरपूर एक नया जहाँ होगा,

सपनों से भरपूर एक नया जहाँ होगा,
जहाँ रोशन तेरे मन का हर दीया होगा,
ना रहेगी कमी किसी भी ख़ुशी की,
नसीब कभी तो तुझ पर मेहरबां होगा…
 
हाँ,माना कि मुश्किल है अभी तेरी डगर,
पर कर मेरे दोस्त,थोडा सा सब्र,
क्या हुआ जो ढक लिया है अभी अँधेरे ने तेरा नूर,
छंटेगा एक दिन ये और मिलेगी सुबह की चाबी जरूर…
 
बस कभी खुद का खुद पर से भरोसा टूटने मत देना,
और हर हाल में तेरे साथ दोस्त, ”मैं हूँ ना”….!!!!
 

तो बता साँसों के साथ मद्धम मद्धम तू रूह में कैसे ना उतरे…!!!

तेरी खुशबू फैली हुई है कमरे के हर कदम ,हर कोने में,
तो बता साँसों के साथ मद्धम मद्धम तू रूह में कैसे ना उतरे…!!!

बिस्तर पे मौजूद है तेरी निशानियों की सिलवटें अब तक,
तो बता तेरी याद फिर जिस्म को हल्के हल्के क्यों ना कुतरे…!!!

तेरी हंसी को ही तो घूँट भर के पिया था मैंने पानी के बदले ,
तो बता मेरी हंसी से तेरा चेहरा फिर फिजाओं में कैसे ना उभरे….!!!

शीशे में दिखता है तेरा अक्स मेरी परछाई से झांकता सा हर बार ,
तो बता आइना देखने को बारम्बार मासूम दिल क्यूँ ना मचले…..!!!

मोहब्बत की हवाएं जब टकरा रही हैं मुझसे अलग ही अंदाज़ में,
तो बता दिल मोहित होकर बल्लियों क्यों और कैसे ना उछले….!!!!!!!!

Friday 17 August 2012

अक्सर पुकारता है

अक्सर पुकारता है,
 जब वो पेड़ जिसकी छाँव ने देखा है,
 मेरी गोद में तुम्हे,
 मंद मंद मुस्कराहट आ जाती है ढेर सारे आंसूओं के साथ,,
 
 अक्सर पुकारता है,
 जब वो बरामदा जिसके क़दमों ने देखा है,
 मेरी ओट में तुम्हे,
 उठा ले जाते हैं सालों पीछे मुझे तेरी यादों के हाथ,,
 
 अक्सर पुकारता है,
 जब वो ख़त जिसकी बेचैनी ने देखा है,
 मेरी लिखावट में तुम्हे,
 तकिये को नमकीन करने में गुज़र जाती है मेरी पलकों की रात,,
 
 अक्सर पुकारता है,
 जब वो कोना जिसके सुकून ने देखा है,
 मेरे वजूद की जन्चावट में तुम्हे,
 नाचने से लगते है मेरे दिल के अनकहे गर्व भरे जज़्बात,,
 
 अक्सर पुकारता है,
 जब वो चौराहा जिसके नुक्कड़ ने देखा है,
 मेरे इंतज़ार में तुम्हे,
 जीवित हो उठती है अधूरी रह गयी अपनी हर मुलाकात,,
 
 अक्सर पुकारता है,
 जब वो समय जिसकी सुईयों ने देखा है,
 मेरे आत्मीय प्यार में तुम्हे,
 सिसकियाँ चुनने लगते है दिल के टुकड़े जिस्म से बाहर आने के बाद,,
 
 अक्सर पुकारता है,
 जब वो चाँद जिसकी सफेदी ने देखा है,
 मेरे करवा चौथ में तुम्हे,
 अंगड़ाई लेने लगते है चाशनी में लिपटे फ़िक्र के संवाद,,
 
 अक्सर पुकारता है,
 जब वो फैसला जिसकी रंगत ने देखा है,
 मेरे भरोसे की ओस में तुम्हे,
 सुगन्धित कर देता है सारे घर को मेरे इश्क की मटकी में अमृत सा भरा नाज,,
 
 अक्सर पुकारता है,
 मुझे हर वो बेजान साया,
 जिसने मेरे और तुम्हारे रिश्ते को सांस लेते देखा है,,
 
 ”क्या तुम्हे भी अक्सर ऐसी पुकारें सुनाई देती हैं”!!!

आइना(couplet)

हँसी यूँ  दिल में और ख़ुशी यूँ  चेहरे पे कभी न थी ,,,,
आइना  भी पूछ रहा है ये कौन सी तमन्नाओं  का आसमान है....!!!!!

बस यूँ ही चलते जा रहे है हम,,

ना कोई ख़ुशी,ना कोई गम,
बस यूँ  ही चलते जा रहे है हम,,
 
जाना कहाँ है,खुद को कुछ पता नहीं,
या यूँ कहिये कि जानना चाहते ही नहीं हम,,
 
खो दिया है अपना सब कुछ ज़िन्दगी के सफ़र में,
और अब ये सफ़र आगे करना ही नहीं चाहते हम,,
 
वक़्त अब भी चल रहा है,पर थम गया है सब कुछ मेरे अन्दर,
और सच पूछो तो ऐसे ही अब रहना चाहते हैं हम,,
 
अब कुछ नहीं है मेरे पास सिवा कुछ बीते प्यारे लम्हों की यादों के,
और कभी कभी उन्ही यादों में जाके जी आते हैं हम,
 
वो यादें ज़िन्दगी से बढ़कर और ज़िन्दगी उनसे ख़ूबसूरत है अब भी,
और इसीलिए  उनके सहारे ही  खुद को अकेला नहीं पाते हम…!!!!
                                                                                                   (२ जनवरी,०७ )

Wednesday 15 August 2012

4 liner

             आज के ज़माने में किसी को प्यार की कद्र कहाँ है,
             हर किसी  का अपना ही एक मस्त जहाँ है,
             अपनी ही दुनिया में इस कदर खोया है हर इंसान,
             कि दिलों में प्यार के पनपने की जगह  ही कहाँ है…!!!

नज़्म

आज एक नज़्म गुजरी आँखों के रास्ते से,
ओझल होते होते नमी छोड़ गयी,
 
ख्याल कौंधा,,
”अच्छा हुआ जो ये नज़्म पढ़ी,
बहुत दिन हुए,
आँखों ने ओस नहीं छुई थी”…!!!

Monday 13 August 2012

कहते हैं तक़दीर होती है इंसान के अपने ही हाथों में,

 अपने और दुनिया के मुहाने पर खड़े हैं कुछ इस तरह,
 कि कभी इस रस्ते तो कभी उस रस्ते को ताकते हैं..!!
 
नियति देती नहीं चुनाव की भी सहूलियत इंसा को अक्सर,
 जानते हुए भी दिलो दिमाग कहाँ इस व्यूह को मानते हैं..!!
 
कहते हैं तक़दीर होती है इंसान के अपने ही हाथों में,
 पर क्या उसके रास्ते सदा हमारी इच्छा से भागते हैं..!!
 
नियति और तक़दीर के खेल में खोता इंसान ही है बेवजह,
 मगर ज्यादा  चिल्लाने से थोड़े ही मंदिर के खुदा जागते हैं..!!
 
गुस्सा क्यूँ न भरे इंसान के भीतर हालात से,बताओ जरा,
 गर  मंजिल से कोसों दूर क़दमों तले अनजान रास्ते हैं..!!!

ख्वाहिशें पतंगों जैसी

कुछ ख्वाहिशें हैं,
 अरमानों जैसी,
 सांस ले रही हैं,
 बंद मुट्ठी में,
 उड़ना चाहती हैं खुली हवा में,
 जैसे पिंजरे से निकले हो पंछी,
 पर सिसकती हैं,
 क्यूंकि
 ख्वाहिशें पंछियों के पंख जैसी नहीं होती,
वो तो कटती हैं पतंगों की भांति,
अपनों से ही तो,
कभी हालात तो कभी जिम्मेदारी के मांजे से,
ख्वाहिशों के पंख हैं,
पर हाथ बंधे हैं…..
ऐसे में उन्हें सहेजने वाली मुट्ठी ही,
उनका गला न घोंट दे तो क्या करे…!!!!!!

Wednesday 8 August 2012

मेरी रूह में तेरी शख्सियत कुछ इस तरह समाई हो…

बतलायें मेरी धडकनें मुझसे पहले तेरे दिल को अपनी बातें,
 मेरी रूह में तेरी शख्सियत कुछ इस तरह समाई हो…
 
 पढ़ जाओ मेरे बिन उभरे लफ़्ज़ों की किताब भी तुम एक झटके में,
 तेरे मेरे रिश्ते में समझ की इतनी गहराई हो…
 
 गर मान लो कभी वक़्त लग भी जाए तुम्हे मेरे कोई ख़यालात समझने में,
 तो भी मेरे सब्र और इत्मीनान की दीवार कभी ना चरमरायी हो…
 
 ना कभी पतझड़ आये मेरे एहसासों की शाखों पर,
 दिल की बगिया में सैर करती तेरी मोहब्बत की ऐसी पुरवाई हो…
 
 भरोसे के चप्पू ने इस तरह थाम के रखा हो रिश्ते को,
 कि समर्पण की नैया तूफानों में भी कभी नहीं डगमगाई हो…
 
 जो भी दे हम एक दूजे को,सिर्फ और सिर्फ अपनी ख़ुशी से दे,
 देकर कुछ पाने की उम्मीद कभी ना रिश्ते से लगायी हो…
 
 आने वाले दौर में जब मोहब्बत खो चुकी होगी अपनी ताजमहल सी परिभाषाएं,
 तब हमारी कहानी चोपालों पर बैठ बुढ़ापे ने जवानियों को सुनाई हो…

तलाश

व्याकुल  ”मैं” ने 
एक आंसू की तलाश में  
सारा  अंतर्मन छान मारा,,
 
छलनी अंतर्मन
पर व्यर्थ…..
आंसू होता तो मिलता ना…..!!
 
आखिर
सारे साल सूरज का मुंह देखने के बाद तो,,
धरती में भी ”दरारें” ही बचती है,,,
पानी नहीं..!!!!

कतरा(couplet)

अबके जो बूँदें गिरी तो  जिस्म खाली खाली बोझिल सा  हो गया है कुछ,
शायद आज  आँखों से रूह का आखिरी कतरा भी बह गया…………!!!!!!!