Monday, 27 August, 2012

तो बता साँसों के साथ मद्धम मद्धम तू रूह में कैसे ना उतरे…!!!

तेरी खुशबू फैली हुई है कमरे के हर कदम ,हर कोने में,
तो बता साँसों के साथ मद्धम मद्धम तू रूह में कैसे ना उतरे…!!!

बिस्तर पे मौजूद है तेरी निशानियों की सिलवटें अब तक,
तो बता तेरी याद फिर जिस्म को हल्के हल्के क्यों ना कुतरे…!!!

तेरी हंसी को ही तो घूँट भर के पिया था मैंने पानी के बदले ,
तो बता मेरी हंसी से तेरा चेहरा फिर फिजाओं में कैसे ना उभरे….!!!

शीशे में दिखता है तेरा अक्स मेरी परछाई से झांकता सा हर बार ,
तो बता आइना देखने को बारम्बार मासूम दिल क्यूँ ना मचले…..!!!

मोहब्बत की हवाएं जब टकरा रही हैं मुझसे अलग ही अंदाज़ में,
तो बता दिल मोहित होकर बल्लियों क्यों और कैसे ना उछले….!!!!!!!!

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